Monday, August, 17,2026

अंतिम समाधान का मंच बनें अदालतें: जस्टिस विक्रम नाथ

जयपुर: राजस्थान हाई कोर्ट के तत्वावधान में राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'कॉमनवेल्थ पीस मीडिएशन एंड रूल ऑफ लॉ-2026' का रविवार को होटल द ललित में समापन हुआ। समापन सत्र में देश-विदेश के न्यायाधीशों, विधि विशेषज्ञों और मध्यस्थता क्षेत्र के विशेषज्ञों ने न्याय व्यवस्था में संवाद, मध्यस्थता और तकनीक की बढ़ती भूमिका पर विचार साझा किए। समारोह में मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एवं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस विक्रम नाथ रहे। कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी रहीं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एवं राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने स्वागत उद्बोधन दिया। जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि अदालतें विवाद की शुरुआत नहीं, बल्कि अंतिम समाधान का मंच बननी चाहिए। देश की अदालतों में लगभग 2.3 करोड़ मामले ऐसे हैं, जिन्हें मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सहमति से हुआ समझौता अधिक स्थायी होता है तथा यह समय, धन और रिश्तों तीनों की रक्षा करता है। उन्होंने ऑनलाइन मेडिएशन, विधि महाविद्यालयों में एडीआर केंद्र और प्रशिक्षित मध्यस्थों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया।

अतिथियों का सम्मान

सम्मेलन में 'जयपुर डिक्लेरेशन ऑन पीस मीडिएशन-2026' को अपनाया गया। समापन अवसर पर अतिथियों का सम्मान किया गया, स्मृति चिह्न भेंट किए गए तथा आर. संथानकृष्णन ने 'कैपस्टोन रिफ्लेक्शंस' प्रस्तुत किए। अंत में राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव हरि ओम अट्टी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। राष्ट्रगान के साथ तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का औपचारिक समापन हुआ।

प्रदेश को वैश्विक मंच मिलने पर जताया गर्व

उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने कहा कि राजस्थान के लिए इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी करना गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि जयपुर संवाद, संस्कृति और वैश्विक सहयोग का प्रतीक बनकर उभरा है। उन्होंने 'वसुधैव कुटुंबकम्' की भावना को आज भी विश्व के लिए प्रासंगिक बताते हुए सम्मेलन के सफल आयोजन पर आयोजकों को बधाई दी।

जल्द लागू होगा पेपरलेस कोर्ट सिस्टम

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने कहा कि राजस्थान की जिला अदालतों को जल्द ही पूरी तरह पेपरलेस मोड में संचालित किया जाएगा। इसके लिए 'डीआईए' (डिजिटल ऑफिस असिस्टेंट) सॉफ्टवेयर और 'न्यायायन' ई-पोर्टल लॉन्च किया गया है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के डिजिटलीकरण से न्याय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनेगी तथा आधुनिक तकनीक न्याय तक आसान पहुंच सुनिश्चित करेगी।

संवाद व करुणा से ही संभव है स्थायी शांति

श्रीलंका सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस एएचएम दिलीप नवाज ने भारत-श्रीलंका के संबंधों को शांति और विश्वास का मजबूत आधार बताते हुए कहा कि न्याय का मूल उद्देश्य समाज में शांति स्थापित करना है। उन्होंने मध्यस्थता को न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए पेशेवर प्रशिक्षण और निरंतर सीखने की आवश्यकता पर बल दिया। जस्टिस वशीस्ट कोकाराम ने कहा कि न्याय व्यवस्था का अंतिम उद्देश्य लोगों को सशक्त बनाना और समाज में स्थायी शांति स्थापित करना है। उन्होंने प्रेम, संवाद और पंचायत जैसी पारंपरिक विवाद समाधान प्रणालियों को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। जस्टिस आभा नायर पटेल ने कहा कि मध्यस्थता न्याय का विकल्प नहीं, बल्कि न्याय तक पहुंचने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने युवा मध्यस्थ तैयार करने, वैश्विक सहयोग बढ़ाने और मेडिएशन को पेशेवर व्यवस्था के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।

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