Friday, October, 30,2026

ट्रायल शुरू होने के बाद भी मुकदमे में संशोधन संभव

जोधपुर: राजस्थान हाई कोर्ट ने जालोर के कृषि भूमि विवाद से जुड़े दो मामलों में जिला अदालत के आदेशों में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। जस्टिस फरजंद अली ने स्पष्ट किया कि ट्रायल शुरू होने के बाद भी परिस्थितियों के आधार पर मुकदमे में संशोधन की अनुमति दी जा सकती है। कोर्ट ने संशोधन की अनुमति और मूल एग्रीमेंट पेश करने के निर्देश को बरकरार रखा। मामला जालोर जिले के भाद्राजून गांव की खसरा संख्या 1353 की कृषि भूमि से जुड़ा है। वादी धनंजय गहलोत ने 13 मई 2019 के एग्रीमेंट के आधार पर शेष जमीन की रजिस्ट्री कराने और स्थाई निषेधाज्ञा के लिए मुकदमा दायर किया था।

उनका कहना था कि 23 फरवरी 2023 को जमीन के 0.1618 हेक्टेयर हिस्से की रजिस्ट्री उनके पक्ष में हुई, लेकिन शेष जमीन का हस्तांतरण नहीं किया गया। बाद में दूसरे पक्षों के नाम बिक्री विलेख कर दिए गए। मुकदमे के दौरान गहलोत ने वादपत्र में संशोधन कर दूसरे पक्षों के नाम हुए बिक्री विलेख रद्द करने की मांग जोड़ने की अनुमति मांगी। जालोर जिला अदालत ने 11 अगस्त 2025 को इसकी अनुमति दी। इसके खिलाफ दूसरे पक्ष ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की।

याचिकाकर्ताओं की दलील

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि ट्रायल शुरू होने और गवाही की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद संशोधन की अनुमति नहीं दी जा सकती। इससे मुकदमे की प्रकृति बदलने और उन्हें नुकसान होने की दलील दी गई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मोती सिंह ने पैरवी की, जबकि प्रतिवादी पक्ष की ओर से डॉ. एए भंसाली ने पक्ष रखा।

वास्तविक विवाद का निपटारा जरूरी

हाई कोर्ट ने कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश छह नियम 17 के तहत संशोधन का उद्देश्य वास्तविक विवाद का निपटारा करना है। कोर्ट को देखना होता है कि संशोधन मूल विवाद से जुड़ा है या नहीं और इससे दूसरे पक्ष के अधिकार प्रभावित तो नहीं होगे। यदि दूसरे पक्ष को जवाब देने का पर्याप्त अवसर दिया जा सकता है, तो केवल असुविधा के आधार पर संशोधन रोकना जरूरी नहीं है। पर्याप्त सुनवाई का अवसर मिलने के बावजूद उसका लाभ नहीं उठाने पर आदेश को बाद में गलत नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने दोनों याचिकाएं खारिज कर दीं।

गारंटी का चेक बाउंस, पत्नी पर भी चलेगा केस

जोधपुर। राजस्थान हाई कोर्ट ने मंगलेश कंवर की याचिका खारिज कर दी। जस्टिस सुनील बेनीवाल ने कहा कि पति के कर्ज की गारंटी में पत्नी का चेक बाउंस होने पर धारा 138 में मुकदमा चल सकता है। मंगलेश कंवर के पति धीरज सिंह चौहान ने रॉयल फाइनेंस के प्रोपराइटर जयदत्त शर्मा से 2.10 लाख रुपए उधार लिए थे। पत्नी ने समान राशि का सिक्योरिटी चेक दिया था। दोनों चेक अपर्याप्त राशि के कारण बाउंस हो गए। शिकायत पर पति-पत्नी के खिलाफ परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 में कार्रवाई शुरू हुई। हाई कोर्ट ने कहा कि केवल गारंटर होने या चेक को सिक्योरिटी चेक बताने से मुकदमा खत्म नहीं होगा।

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